भारत में फुटबॉल की नींव कैसे पड़ी
उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश सैनिकों और व्यापारियों ने कोलकाता में फुटबॉल खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने भी इस खेल को अपनाया। मोहन बागान ने १९११ में IFA Shield जीतकर इतिहास रचा — यह किसी भारतीय क्लब की पहली बड़ी जीत थी। इसके बाद डूरंड कप और संतोष ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताएं राष्ट्रीय पहचान बनीं। दिल्ली और गुवाहाटी जैसे शहरों
में भी धीरे-धीरे फुटबॉल की लोकप्रियता फैली। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) की स्थापना ने इस खेल को संगठित ढांचा दिया। यह पूरा सफर भारतीय खेल संस्कृति की एक अनोखी कहानी है।